पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो  ने चौधरी शुगर मिल्स मामले में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था और यह संभावना जताई गई थी कि  शरीफ शुक्रवार को जवाबदेही अदालत के समक्ष पेश  होगें ताकि  रिमांड मांगी जा सके।

पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
नवाज शरीफ

नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो  ने चौधरी शुगर मिल्स मामले में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था और यह संभावना जताई गई थी कि  शरीफ शुक्रवार को जवाबदेही अदालत के समक्ष पेश  होगें ताकि  रिमांड मांगी जा सके। इसके मद्देनजर एनएबी ने नवाज शरीफ को गिरफ्तार कर लिया है। डॉन न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि एनएबी अध्यक्ष ने नए धन शोधन  मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। वहीं बताया गया था कि लाहौर ब्यूरो की एक टीम कोट लखपत जेल में शरीफ से मुलाकात करेगी और उन्हें जवाबदेही अदालत ले जाएगी। अब उन्हें गिरफ्त में ले लिया गया है

बता दें कि अभी शरीफ अल-अजीजिया मिल्स भ्रष्टाचार मामले में सात साल कैद की सजा काट रहे हैं। इससे पहले, 8 अगस्त को, जवाबदेही ब्यूरो ने चौधरी शुगर मिल मामले में उनकी बेटी मरयम नवाज और भतीजे यूसुफ अब्बास को गिरफ्तार किया था। दोनों अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर हैं। एनएबी ने मुख्य रूप से मरयम पर चीनी मिलों के शेयरों की बिक्री / खरीद की आड़ में मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया।

जवाबदेही प्रहरी ने कहा कि वह( मरयम ) 2008 में मिलों की सबसे बड़ी शेयरधारक बन गई थी, जिनके पास 12 मिलियन से अधिक शेयर थे और उनकी संपत्ति भी उनकी आय से बेमेल थी। जांच के दौरान यह पता चला था कि विदेशियों के लिए शेयर जारी करने के नाम पर 2001 से 2017 तक मिलों में भारी निवेश किया गया था।

दिलचस्प बात यह है कि बाद में, कंपनी के एक ही शेयर को अलग-अलग मौकों पर मरयम, हुसैन और नवाज को वापस दे दिया गया था, जबकि उक्त विदेशी व्यापार भागीदारों को कोई पैसा नहीं दिया गया था।

मरयम ने एनएबी की संयुक्त जांच टीम के सामने अपनी उपस्थिति में, विदेश से व्यापारिक संबंधों से इनकार कर दिया था। उन्होंने कई लोगों को पहचानने भी नहीं, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

एनएबी के सूत्रों ने कहा कि जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि विदेशियों के नाम का इस्तेमाल कंपनी में भारी निवेश करने के लिए किया जाता था क्योंकि शरीफ परिवार के पास निवेश के लिए सफेद(एक नंबर का पैसा) धन नहीं था। इसके अलावा, ब्यूरो भी शाहबाज परिवार के सभी सदस्यों की कथित धन-शोधन और संपत्ति के साधनों से परे संपत्ति की जांच के लिए जांच कर रहा है।


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